कैसा अजब ही रंग मन मेरे अब तो तजो कुसंग। कैसा अजब ही रंग मन मेरे अब तो तजो कुसंग।
जिसके पेट में उसकी खोजी मशीनें अन्न नहीं दिखाएंगी जिसके पेट में उसकी खोजी मशीनें अन्न नहीं दिखाएंगी
मैं दिल से मजबूर हूँ अपने और वो दुनियादारी से। मैं दिल से मजबूर हूँ अपने और वो दुनियादारी से।
होती है जब वोटों की राजनीति तब होता जन जन से कूटनीति होती है जब वोटों की राजनीति तब होता जन जन से कूटनीति
साँच को नहीं आँच। साँच को नहीं आँच।
आम जनता को भी हो गया है इस बात का बोध। इसलिए वह नहीं करती कोई प्रतिरोध। आम जनता को भी हो गया है इस बात का बोध। इसलिए वह नहीं करती कोई प्रतिरोध।